Author: Dashrath Sharma

Dashrath Sharma works as a Training Officer with the NGO, Educate Girls in Jhalawar, Rajashthan.
<strong>किताबों </strong><i>से प्यार</i>
Issue 5 – April 2018, Spotlight

किताबों से प्यार

जब मैं अपनी पिछली जिन्दगी में झाँकता हुँ (वैसे अभी ज्यादा गुजरी नही हैं) तो मुझे लगता हैं कि मैरे अकेलेपन के दिनों में कोई मेरा सच्चा साथी रहा हैं तो वो हैं किताबें। शुरू से ही किताबें खरीदने और पढ़ने का शौक काफी रहा। किताबें और खुद के बनाए हुए नोट्स संभालकर रखने की लगन इतनी प्रगाढ थी कि परिक्षा समाप्त होने के बाद जब हिसाब लगाते थे तो पता चलता था कि एक बोरा भरकर किताबें और रजिस्टर जमा हो गए हैं। कच्चा घर होने के कारण ज्यादा किताबें तो संभालकर नही रख पाया परन्तु फिर भी लगभग काफी किताबें सुरक्षित मिल जायेगी। सरकारी विद्यालय में पढ़ने के कारण हमें किताबें निःषुल्क मिल जाया करती थी या घर वाले किसी रिष्तेदार भाई-बहिन (जो मुझसे एक कक्षा आगे जा चुके थे) की दिलवा देते थे। मुझे पहली किताब कक्षा छः के दौरान खरीदने का मौका मिला, वो भी घर वालो से काफी जिद करके तथा पाँचवी में अच्छे प्रतिषत अंक प्राप्त ह...