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यह फ़िल्म समाज में व्याप्त हिंसा के मूल कारणों की ओर हमारा ध्यान केंद्रित कर रही है। जिसमें अशिक्षा ही मूल कारण दिख रहा है।अतः एक ऐसी लाइब्रेरी संचालित कर जो समाज के भटके प्राणियों को उचित दिशा प्रदान कर सके की स्थापना एवं संचालन करना सराहनीय कार्य है ।पुस्तकालय में प्राप्त संग्रह कुछ लोगों द्वारा प्रदत्त है।फिर भी प्रबंधन हेतु क्या व्यवस्था की गई है स्पष्ट नहीं हो सका है।यह एक सर्व साधारण के लिये हमेशा खुली हुई है ऐसा बताया गया है।फिर सुरक्षा व्यवस्था क्या है?मन में एक प्रश्न उत्पन्न करता है?कहीं हम उस आदर्श की बात तो नहीं कर रहे जो राम राज्य की कल्पना करता प्रतीत होता है।
1 पुस्तकालय समाज के भटकाव को दूर करता है।
2 समाज पढने के लिए स्वाभाविक रूप से जिज्ञासु है, पुस्तकालय का अनुकूल वातावरण पढने का शुकुन प्रदान करता है।
3 दुर्लभ संग्रह पुस्तकालय के आकर्षण का एक हेतु है।
पुस्तकालय में पढ़ने(इकरा) की आजादी प्रेरक है। समुदाय व समाज को सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा देती है।पुस्तकालय का समय प्रबंधन समाज के हर वर्ग को जोड़ने में समर्थ है। दुर्लभ संग्रह पुस्तकालय की साख बढ़ाने वाला है। मेरा मानना है कि freeness of reading is a creation of joyfull reading. So I can say that library is the real place of developing thought , knowledge and personal satisfaction.
Subhash – alwar (Rajasthan)
समाज के सम्पूर्ण विकास मे पुस्तकालय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि पुस्तकालय हर व्यक्ति को उसकी रूचि एवं सुविधा अनुसार पाठ्यसामग्री उपलब्ध कराता है।पुस्तकालय लोगों को अच्छे पाठक बनाता हैं।